Mayank Kumar
Others
बेसब्री से इंतजार था उनका
हमारे दिल में घर था जिनका
जिन से मिलते ही हम दिन हो जाते
इस जहान में हम खिल जाते
ख़्वाब दिखाना काम था जिनका
नेताजी नाम था उनका
तुम एक कलम सी...
उस चाँद का भी...
कुछ खिला चंदा...
पहरेदार
आधी रोटी
मैं भीग रहा ह...
तू कहीं खो गय...
कुछ बातों को ...
मैं तेरे लिए ...
मेरे अंदर वह ...