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एम के कागदाना

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3.8  

एम के कागदाना

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ना चाहिए उपहार मुझे

ना चाहिए उपहार मुझे

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ना चाहिये उपहार मुझे,बीर एक कहण पुगाईये । 

जब जरूरत हो मुझे, बस खड़ा बराबर पाईये। 


ना आईये तु जल्दी जल्दी, बस त्योहार पे पहुँच जाईये । 

भात ,छूछक में वक्त पे आके, मेरा मान बढाईये । 

ना चाहिए मुझे पैसे-वैसे,आऊँ तब मुंह ना फुलाईये । 

रोज रोज का मैं ना कहती, साल मै एक बार बुलाईये । 


देण लेण ये दुश्मन हो गया, रिश्ता दिल से निभाईये । 

एक रूपया बहुत बढा है, कर्जा सिर ना चढ़ाईये । 

छूछक मेरा लेके आईये, खुशी से गुड़ बंटाईये । 

गहने वहने मुझे ना चहिये,, बस मेरा पीळिया लाईये । 


भाणजे भाणजी का ब्याह रचाऊं,तु खुशी से नाचता आईये । 

सास नणद का मान राखिये, दिल ना उनका दुखाईये । 

भात नयुंदण जब मैं आऊँ, भेली मेरी धरवाईये । 

सारे कुणबे को लेके आईये, चूंदड़ी मुझे उढ़ाईये । 



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