STORYMIRROR

Bhawna Kukreti Pandey

Others

3  

Bhawna Kukreti Pandey

Others

मुगालता

मुगालता

1 min
256

हैं मायूस बेहद आज, अपनी ही नज़रों में हम।

कि हुए मुज़रिम भी हम, और मक्तूल भी हम।


रखा था दिल में आपने, शायद हमें मदहोशी में,

खूबसूरत उस मुगाल्ते में, बेज़ा ही पड़े रहे हम।


हाँ दोस्ती में इश्क़ के, घाव से बेहद शर्मिंदा हम।

किस मुंह से कहें हैं बेज़ार खुद से ही आज हम।



Rate this content
Log in