Buy Books worth Rs 500/- & Get 1 Book Free! Click Here!
Buy Books worth Rs 500/- & Get 1 Book Free! Click Here!

नीलम पारीक

Others


5.0  

नीलम पारीक

Others


मन मलंग

मन मलंग

1 min 497 1 min 497

नित घूमती

एक ही धुरी पर

धरा ज्यूँ

काटती 

अपने ही

सूरज के चक्कर

नित्य-निरन्तर

कब दिन चढ़े

कब रात ढ़ले

न अनजान

न बेखबर


फ़िर भी

संस्कारों की

धुरी पर

परिवार के

इर्द गिर्द

निरन्तर

परिभ्रमण करते

कभी-कभी

किसी पल

सुन कोई अनसुनी 

बाँसुरी की धुन

हो जाता है

मन मलंग

चढ़ जाता है 

मटमैले दुपट्टे पर

कोई राता रंग

और बस वो एक पल

जाने कितने पल

कर जाता है

सुनहरे- रुपहले...


Rate this content
Log in