STORYMIRROR

नीलम पारीक

Others

4  

नीलम पारीक

Others

मन की मुंडेर पर

मन की मुंडेर पर

1 min
474

मन की मुंडेर पर

यादों के पंछी

करते हैं कलरव

अहर्निश

कुछ मीठी यादें 

बस जाती हैं


कोयल की कूक में

कभी प्रेम पगी यादें

बन जाती हैं

पपीहे की पुकार

कभी भोर संग

चिंचियाती चिड़िया


माँ ज्यूँ आ जाती है

जगाने

वो नन्हा सा नीड़

बया का

याद दिलाता है 

सावन के झूले की

मन उड़ जाता है

लेकर पंख 

यादों के दरीचों में


जी लेता है कुछ पल

महके से, चहके से,

भूल कर कुछ पल को

वीरान सी तन्हाईयाँ

मुस्कुरा लेता है

कुछ क्षण

भूल कर सब ग़म

जो बन गए हैं जीवन का

एक रंग... बदरंग सा



Rate this content
Log in