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Dharmendar Nishad

Children Stories

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Dharmendar Nishad

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मन के हारे हार

मन के हारे हार

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मन के हारे हार सदा रे

मन के जीते जीत,

मत निराश हो यों तू उठ,

ओ मेरे मन के मीत !



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