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Dr.Deepak Shrivastava

Others

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Dr.Deepak Shrivastava

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मी टू

मी टू

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नारी शक्ति पुरुष पे भारी

पुरुष का अमंगलकारी


नारी कहती मी टू

पुरुष को करती आहत

नहीं हे कोई चाहत

सिर्फ हे नारी की बैखलाहट

पुरुषों में घबराहट

करती उन्हें किसी के प्यार से वंचित

दोनों ही हैं एक दूसरे के पूरक

फिर कैसी मी टू


पुरुष भय युक्त

कैसे करे व्यवहार

ये कैसा दुराचार

प्यार दोनों ने किया फिर कैसा मी टू


प्यार करे तो परेशानी नहीं करे तो

ज़िन्दगी बेमानी

दोनों बराबर के होते है दोषी 

फिर क्यों पुरुष को ही देनी पड़े क़ुरबानी

यही नारी शक्ति की मेहरबानी


नारी शक्ति का ये कैसा उपयोग

करती पुरुष के विरुद्ध अभियोग

मन डरता, तन डरता

स्वयं डरता, परिजन डरते

कैसा आचरण, कैसा सदाचरण 

फिर कैसे प्यार करता,

विवाह करता

नारी की स्वतंत्रता, स्वच्छंदता

नहीं मानती किसी भी रुकावट को परिवार समाज की मान्यताओं को 

नारी की आजादी का

बराबरी का 

नहीं कोई विरोध

पर ना हो उसका दुरुपयोग

पुरुष प्रताड़ित होते

भय युक्त जीवन जीते

विवाह विच्छेद का दर्द सहते

फिर ये कैसी नारी शक्ति

फिर ये कैसी आजादी

जो पुरुष पे भारी

कौन सही कौन गलत

क्या सही क्या गलत

किसको समझाता 

पुरुष अपना दर्द किसको बतलाता

यही है नियति जीवन की

यही मान कर चुप रहा जाता

सत्य जो असत्य को ठुकराता 


अन्यथा ना लें..


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