महँगा सौदा
महँगा सौदा
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माँ के साये में जिये
कभी बड़े न हो पाए
बच्चा बनकर जीना आसान
सारे दुखो से रहते अनजान।
नासमझ ही भले थे
तर्को से परे थे
अक्ल साथ शामत लाई
दुनिया सारी लगे हरजाई
दौड़ते दौड़ते थकने लगे
जीवन से अब ऊबने लगे
रुतबे की तलाश में
भटक गए बाजार में
नादानी की बगिया को छोड़
शरारत को पीछे छोड़ आए
गुमनामी में डूब गए
महंगा सौदा कर आए
