STORYMIRROR

Rishabh Tomar

Others

4  

Rishabh Tomar

Others

मदमस्त पवन के झोंके

मदमस्त पवन के झोंके

1 min
439

मदमस्त पवन के झोंके है 

कलियों से सजी बारात है

फागुन दूल्हा के स्वागत में 

खिलती ये ज्योत्स्ना रात है


तन मन वन कुंजन खिले खिले 

महके मिलकर अमराई है

राधा व्यकुल कान्हा के लिये 

व्यकुल राधा को कन्हाई है


सब रंगा हुआ है बासंती 

बासंती पीला चाँद खिला

फूलों का रंग सुहाना है 

हर उर में प्रीत का रंग घुला


अंतस धड़के राधे राधे 

मन जपता अपना कृष्णप्रिया

तारकद्युति देख देख कर के

नयनों के संग है मुदित जिया


राकापति धवल चाँदनी ये

मुरली के संग ललचाती है

यमुना तट पर हर राधा को

अवगुंठन कर सकुचाती है


धरती दुल्हन सी लगती है 

अलियाँ कलियों सी खिलती है

सरसो की पीली चादर ये

चाहत के सपन को सिलती है


शशि नन्हे बालक की तरह

नव रजत हिंडोला सजाता है

फागुन अपनी मस्ती के संग

मन मृदंग ये मानो बजाता है


दस दिशो चंद्रिका खिली खिली

यौवन से सुसज्जित धरती है

करने को गगन को मगन यहाँ

ये पुलक प्रकट जनि करती है


रंगीन मिजाज है फागुन का 

रंगों का ये त्योहार लिये

हिन्दू मुस्लिम सिख ईसाई

सबकी खातिर है प्यार लिए।


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन