मानो या ना मानो
मानो या ना मानो
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कोई माने या ना ना माने,
पर नजर लगती... है।
तुम मानो या मत मानो,
हकीक़त में जादू होता है।
जिंदगी हो जाती है तबाह,
जब जादुई असर होता है।
प्रातः काल के प्रथम प्रहर,
के सपने भी सच होते हैं।
बिन मौसम अब तो यहाँ,
बादल झूमकर बरसते हैं।
जंगल हो रहे वीरान,
लोग वहां जाने से डरते हैं।
महिला सशक्तिकरण हुआ है,
फिर भी अत्याचार हो रहे हैं।
जनता है अभी तक परेशान,
भ्रष्टाचार खत्म नहीं हो रहे हैं।।
