माँ मेरी जन्नत
माँ मेरी जन्नत
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जन्नत जन को जनती है
अपने शीतल छाया में रखती है,
कोई अश्क नहीं जीवन में
जब मां संग हमारे रहती है ।
अपना कोई दर्द न टोले
सबको अपना फिर बोले,
सारे संसार की खुशियाँ
फिर हम सब में यूं छोले।
कोई अपना नहीं या पराया
सबका यूं खेल बनाया,
सबको इस दुनिया के
फिर लायक यूं ही बनाया।
ये मेहरबानियाँ है माँ की
जो हर रिश्तों से पड़े है,
अपना दुख दर्द छोड़ के
बस हम सबकी खुशियों की
परवाह है।।
