लंबे सफ़र की है थकन
लंबे सफ़र की है थकन
1 min
158
उम्र का ये दौर है
अब वो कोई और है
है कभी हताश सा,
उदास और निराश सा।
अनजान आगे का सफ़र ,
बूढ़ा हुआ है यह शज़र
इससे जिनको छाँव मिले,
उनसे ही कई घाव मिले।
कुछ रहे बैराग सा
कुछ मन में राग सा,
लंबे सफ़र की है थकन
दिल में है कैसी जलन।
सफ़र है मंज़िल नहीं,
अब रहे न ख़ाब ही,
सूनापन घर भर में है
वक़्त अब कटता है नहीं।
