अच्युतं केशवं
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अलि कलियां कोंपल सुमन, भ्रमरगीत पिक तान।
लिए बसंता बाबरा, बैठा अजब दुकान।
बैठा अजब दुकान, आम भी है बौराये।
जल दर्पण निज रूप, देख धरती न अघाये।
मादकता ऋतु रूप, धरे धरती पर इस पल।
झूम झूम इतराय, फूल अलि कलियां कोंपल।
मन आस तारा
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