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AKIB JAVED

Others

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AKIB JAVED

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क्या है

क्या है

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ये पहलू में मधुबन है 

गुलशन है क्या है,

दिखता जो ये दर्पण है

जीवन है क्या है।

है कुछ तो असर 

तेरी बातों में, यूँ तो

ये तेरा छलावा है

झूठापन है क्या है।


दिखता तू मुझको 

हर पल ही वैसा,

ये मेरी उलझन है 

नयापन है क्या है।

यूँ तो मुख़्तसर-सी 

है ये ज़िन्दगी भी,

जो गुज़रा ये यौवन है

बचपन है क्या है।


नज़र  धुँधली आती 

तस्वीर होगी,

ये उनका नज़रिया है

उलझन है क्या है।

हुआ कब है उनका

हक़ीकत से सामना,

ये उनका ही चित व

उपवन है क्या है।


छुपाया नहीं है 

किसी से भी कुछ भी,

ये 'आकिब' भी चन्दन है

कुंदन है क्या है।


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