कन्हैया मटकी
कन्हैया मटकी
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देखो मटकी पे मटकी कन्हैया दरिया खटकी तो खट हे समाये
हो कान्हा कंकरिया जोर की लगाईये
आज नही आई मेरी संग सहेली
जितना सताले चाहे देख के अकेली
मैया को जाके तेरा हाल सुना दूं
श्याम करे मनमाणी रे मटकी.....
इतने मे आई दो चार गुजरिया
कैसा हाल किया राधा राणी का सांवरिया
ठहर रे कान्हा मैं तूने बताना
गुजरी कान पकड के ले आई रे
भगता के मन में ककडीया लगी
ककडीया लागी तो भक्ती मन मे जागी
गाता गुणगान करा
जन जन ने ये बात बताई रे
मटकी.......
