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कुमार संदीप

Others

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कुमार संदीप

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कलम

कलम

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मेरी कलम जब चलती है

बयां करती है वृद्ध की पीड़ा

बयां करती है किसानों का

क्रंदन

हाँ कलम जब चलती है,

बयां करती है आज की सच्चाई।


मेरी कलम जब चलती है

व्यक्त करती है नारी की पीड़ा

व्यक्त करती है दर्द ग़रीबों की

हाँ कलम जब चलती है,

बयां करती है आज की सच्चाई।


मेरी कलम जब चलती है

कहती है मुझसे, थक चुकी हूँ

लिखते-लिखते

आज के मानव के कुकर्म,

इंसानों में नहीं बची है अब शर्म

हाँ कलम जब चलती है,

बयां करती है आज की सच्चाई।


मेरी कलम जब चलती है

बयां करती है माँ धरती की

करुण पुकार

बयां करती है पेड़ों की सिसकियां

हाँ कलम जब चलती है,

बयां करती है आज की सच्चाई।



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