STORYMIRROR

किसे ख़बर के है क्या क्या ये

किसे ख़बर के है क्या क्या ये

1 min
341


किसे ख़बर के है क्या क्या ये जान थामे हुए

ज़मीं थामे हुए आसमान थामे हुए


फ़ज़ाएँ कुछ भी नहीं हैं फ़क़त नज़र का फ़रेब

खड़ा हुआ है कोई आसमान थामे हुए


सफ़ीना मौज-ए-सैल-ए-बला से गर्म-ए-सतीज़

हवा का बार-ए-गिराँ बादबान थामे हुए


गिरा है कोई जरी ऐ फ़सील-ए-शहर-ए-तबाह

मुज़ाहिमत का दरीदा-निशान थामे हुए


सड़क के पार चला जा रहा है बचता हुआ

किसी का हाथ कोई मेहरबान थामे हुए


अजब तिलिस्म सा मंज़र है भीगती हुई शाम

कोई परी है धनक की कमान थामे हुए



Rate this content
Log in