ख्याल
ख्याल
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कभी कभी मेरे दिल में ख्याल आता है,
काश!कि ख्याल आने भर से ही हमारे काम पूरे हो जाते,
फिर ये भी ख्याल आता है,
की अगर ख्याल आने भर से ही काम पूरे हो जाते,
तो क्या हम कोई मेहनत करना चाहते?
और अगर ज्यादा दिन मेहनत नहीं करते, आराम ही करते,
तो क्या ख्याल आने लायक भी रह पाते.?
बस ख्याल आया था, कहने का
सोचा कहकर इस ख्याल को पूरा किया जाए।
