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Jai Singh(Jai)

Others

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Jai Singh(Jai)

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" खास बना मधुमास "

" खास बना मधुमास "

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बिखरा बसन्त धरा पे , बौराई अम्र डार

पुरवाई ऐसी चली, नयन हो रही चार

नयन हो रही चार,कूक सुनी है रसीली

पपीहा रहा बोल,फिजा बनी है सजीली

रंग बिरंगे फूल ,बढा रहे भ्रमर नखरा

खास बना मधुमास,रूप अवनी का बिखरा।


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