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Dhirendra Panchal

Others


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Dhirendra Panchal

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खाला खिचड़ी ए बबुआ

खाला खिचड़ी ए बबुआ

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ससुरा के माड़ो के तू ही चनरमा।।

मुँहवा फुलाय बाबू जईबा कहाँ।

खाला खिचड़ी ए बबुआ खईबा कहाँ।


बाथे कपार कहा मरचा घुमा दीं।

गरमी लगत बा त बेना डोला दीं।

साली सढ़ूआईन सब तोहे समझावे,

खोदी सरहज त बबुआ लुकईबा कहाँ।

खाला खिचड़ी ए बबुआ खईबा कहाँ।


काहे खिसियाईल बाड़ा बोला तू हाली,

सईकिल आ सिकड़ी के बात रहे खाली,

हमनी के अइसे अँउजल जनि करा,

ना त मूसर के घुसर पचईबा कहाँ।

खाला खिचड़ी ए बबुआ खईबा कहाँ।


खाला हाली हाली तोहे अँगूठी पहिराय देब।

हथवा के खातिर एगो घड़ियो मँगाय देब।

सास ससुर बईठ सब तोहके मनावे,

बाबू होखी निरदईया जईबा कहाँ।

खाला खिचड़ी ए बबुआ खईबा कहाँ।


ससुरा के माड़ो के तू ही चनरमा।।

मुँहवा फुलाय बाबू जईबा कहाँ।

खाला खिचड़ी ए बबुआ खईबा कहाँ।



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