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Ayusmati Sharma

Others

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Ayusmati Sharma

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कैसी ये मजबूरी

कैसी ये मजबूरी

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न छोटी,

न बड़ी होती है ये मजबूरी,

दुनिया जिसका मज़ाक बनाती है

वही होती है ये मजबूरी,

वैसे बता दूँ उस दुनिया को की

मज़ाक उड़ाना नहीं होती है जरूरी,

क्यों की ज़िंदगी ला खड़ा करती है

मजबूरियां एक अनजान मोड़ पर,

जब इंसान बुराईयां अपना लेता है,

अच्छाई को छोड़ कर।


आखिर कैसी ये मजबूरी,

कोई मुझ को ये बता दे क्यों

है ये मजबूरी।


मर जाए वो मजबूरी,

जिनकी वजह से है ये दूरी,

आखिर क्यों है ये दूरी,

कैसी ये मजबूरी,

जब मिलना चाहे तो मिल ना सके,

जब कहना चाहे तो कह ना सके,

जब देखना चाहे तो देख ना सके,

न हम दोनों में है कोई दूरी।


आखिर कैसी ये मजबूरी,

क्यों है ये मजबूरी।


बहुत कुछ है मेरी कमज़ोरी,

बस कह नहीं पाती यही तो है

मजबूरी,

भला कोई क्यों नहीं समझ पाता

मेरी खामोशी को,

वैसे ये खामोशी भी है मजबूरी,

कहीं नजदीकियां बढ़ाती है तो

कहीं दूरी।


आखिर कैसी ये मजबूरी,

क्यों है इतनी दूरी,

भला कैसी ये मजबूरी।



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