काश ये बचपन फिर लौट आता
काश ये बचपन फिर लौट आता
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इन बच्चों की तरह ही
कितना मासूम होता है बचपन
न साधनों की लालसा
न भौतिकता का लोभ
न महंगे खिलौने की चाह
न पाँव में हो जूते, चप्पल
बस अपनी धुन में
अभाव में भी
जुगाड़ कर लेते है खेलने का
हमेशा खुश रहना
हर बात पे मुस्काना निश्छल
यही तो बचपना है
न छल कपट हृदय में
न ईर्ष्या, द्वेष रहता है
धरती अपना घर
अम्बर छत सा लगता है
फ़टे, पुराने कपड़े पर भी गौर नहीं
ख़ुशियों से भरी जेब रहती है
काश ये बचपन फिर लौट आता
तो जीती अपने हिसाब से
