कान्हा सी प्रीत
कान्हा सी प्रीत
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मैं कान्हा में प्रीत देखती हूं,
जग से प्रीत लगाओ तो सिर्फ दुख मिलता है,
मेरे कान्हा के साथ मोक्ष मिलता है,
उनको मैं हमेशा अच्छी लगती हूं,
वो मुझे कभी गलत नहीं समझते,
वो मेरी कभी किसी से तुलना नही करते,
में कान्हा में प्रीत देखती हूं,
कान्हा कान्हा करते करते उमर गुजर जाएगी,
इस गोपी को।
