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Noor N Sahir

Others

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Noor N Sahir

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कागज़ की जेल

कागज़ की जेल

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ये डायरियाँ उसी की हैं,

जो मुझे कागज़ की जेल में,

हमेशा के लिए क़ैद कर गई ,

अल्फाज़ की हथकड़ी से,

एहसास की बेड़ियाँ डाल कर,


मेरे हाथों से यूँ निकल गई,

जैसे कटर से पेंसिल की खाल,

जैसे कच्ची पेंसिल से लिखे अल्फाज़ ,

रबर की एक रगड़ से मिट जाते हैं,

ये डायरियाँ उसी की हैं,

जो अब इस दुनिया में नहीं है



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