End of Summer Sale for children. Apply code SUMM100 at checkout!
End of Summer Sale for children. Apply code SUMM100 at checkout!

Mayank Kumar 'Singh'

Others


5.0  

Mayank Kumar 'Singh'

Others


जुगाड़ के नक़ाब

जुगाड़ के नक़ाब

1 min 217 1 min 217

क्यों पहनूँ मैं भला ये झूठी

जुगाड़ के नक़ाब 

बड़ी घुटन होती है खुद से ही

जिसे मंज़िल समझ चल रहा था

वो खुद मंज़िल की तलाश में था


दुनिया को भला और कितने

नक़ाब में देखूँ

इतने नक़ाब में कितने

पहचान देखूँ

सोचता हूँ खुद भी एक

नक़ाब पहनूँ

पर फिर वहीं बात ,

चेहरे नायाब मिलेंगे 

नक़ाब लगाए चेहरे में

कोई पहचान भी तो नहीं

 

पर नक़ाब उतारने के बाद 

क्या होगा ?

वहीं शायद जो पहले था

तो हजार उलझनो को छोड़

किसी छोर को थाम लेते हैं

दिल के घोंसले को उजाड़ कर

मोम में बत्ती सुलगाते हैं

किसी और रौशनी के लिए

खुद को पिघला कर ,

जलाते हैं।

  



Rate this content
Log in