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Ruchi "Harsh"

Others

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Ruchi "Harsh"

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ज़माने भर में

ज़माने भर में

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जमाने भर में ढूंढा,

जमाने भर में ढूंढा

ना मिला सुकून,

ना आराम,


कोई था मुझसे नाराज़

किसी से मैं था नाराज़

एक लम्हा ठहरा,

दम भर के छोड़ी सांस


खुद ही थामा

खुद का हाथ ,

राहत मिली

राहत मिली ,

मुकम्मल लगने

लगा जहां।

         

             



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