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Sneha Rathi

Others

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Sneha Rathi

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जज्बात सपनों के

जज्बात सपनों के

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दबे पांव आया कल रात एक सपना, 

 क्यों बदल दिया उसनें रुख़ ही अपना, 

 पलट दिया माईनें दोस्ती के, 

 दे गया नये पल खुशी के,

 इक खूबसूरत सा इशारा, 

 जज्बात से दिल रंग गया हमारा, 

 देखी जो खुशी तेरी आंखों की,

 भुला ना पाए एक पल भी मुस्कान तेरे लबों की,

 सुबह उठी, 

 नींद टूटी, 

 टूटा इसी के साथ वह सपना, 

 कैसे बयान होने से रोके हाले दिल अपना.... 


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