Neer N
Others
बमुश्किल दो दिन गुज़र होती है,
कहीं पे मंज़िल, कहीं पे नज़र होती है
ज़िन्दगी का हिसाब,
किताबों का मोहताज नहीं,
ये तो मौत तक का बस सफ़र होती है।
मां....
दवा
नीर
दोस्त....
तुम मुझे पढ़ ...
मुझे पसंद नही...
खूबसूरत
तुम्हारे खत.....
बेख्याली का ख...