जीवन ही सतरंगी होली
जीवन ही सतरंगी होली
1 min
262
होली के सतरंगी
रंगों में आठवाँ रंग
बड़े चाव से सजाया था
समय की आंधी ऐसी चली
दूसरे घर की रंगोली
में वह घुलमिल गई
तब से
होली को लेकर जब भी
बैठती हूँ लिखने कविता
लिख बैठती हूँ जीवन की कविता
जीवन होली से अलग कभी
दिखा ही नहीं मुझे
कौन सा रंग नहीं है इसमें
होली का रंग तो धूल जाता है
जीवन का रंग जैसे जैसे चढ़ता है
अनुभव परिपक्व बनता जाता है
