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Suparna Mukherjee

Others

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Suparna Mukherjee

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जीवन ही सतरंगी होली

जीवन ही सतरंगी होली

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होली के सतरंगी 

रंगों में

आठवाँ रंग

बड़े चाव से सजाया था,

समय की आँधी ऐसी चली

दूसरे घर की रंगोली 

में वह घुलमिल गई।

तब से

होली को लेकर जब भी 

बैठती हूँ लिखने कविता,

लिख बैठती हूँ जीवन की कविता,

जीवन होली से अलग कभी 

दिखा ही नहीं मुझे

कौन सा रंग नहीं है इसमें,

होली का रंग तो धुल जाता है,

जीवन का रंग जैसे जैसे चढ़ता है  

अनुभव परिपक्व बनता जाता है।



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