जग में सबसे प्यारी माँ
जग में सबसे प्यारी माँ
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जग में सबसे प्यारी माँ
जिनके प्यार की नहीं सीमा
अपने बच्चों की भूलों को
करती रहती सदा क्षमा
खुद की खातिर कभी न सोची
जलती रहती जैसे जले शमा
सदा लुटाती प्यार की गगरी
स्नेह का निर्झर कभी नहीं थमा
घर के काम काज में इनका
दिल अंदर से रहे रमा रमा
बाबूजी गुस्सा जाते फिर भी
ये हर दम रहती नमा नमा
दान सदा दुखियों को करती
पैसे जो रखती जमा जमा
घर सूना सूना लगता जब
नानी के घर जब जाती माँ
इनके चरणों पर अर्पित हो
जो भी लाऊँ मैं कमा कमा
शीश नवाऊँ शीश झुकाऊँ
जीवन की खुशहाली है माँ।
