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Kavi Devesh Dwivedi 'Devesh' (कवि देवेश द्विवेदी 'देवेश')

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Kavi Devesh Dwivedi 'Devesh' (कवि देवेश द्विवेदी 'देवेश')

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जब बसंत के फूल खिलेंगे

जब बसंत के फूल खिलेंगे

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  • पीली चूनर ओढ़े सरसों,
  • खेतों में खुशी बिखेरेगी। 
  • कोयल भी कू-कू-कू करके, 
  • सबकी ही सुध-बुध ले लेगी। 
  • फागुन की मस्ती में डूबे, 
  • रंगों से आँगन खूब सजेंगे। 
  • हर दिल में उल्लास बसेगा, 
  • जब बसंत के फूल खिलेंगे।1। 

  •  आमों में होंगे बौर बहुत,
  • महकेगी बागों की क्यारी।
  • तितली के झुण्डों से शोभित,
  • होगी फूलों की फुलवारी।
  • हर मन में छायेगी आशा,
  • कुछ कर जाने के भाव जगेंगे।
  • अंग-अंग ऊर्जस्वित होगा,
  • जब बसंत के फूल खिलेंगे।2।

  • ढोलक की थापों थिरकन से,
  • हर गली चौबारे झूमेंगे।
  • जोड़ हाथ जयकार लगा,
  • मंदिर की चौखट चूमेंगे।
  • घर-घर माता की चौकी में,
  • कन्या पूजन कर पुण्य मिलेंगे।
  • होगा स्वागत नव संवत्सर का,
  • जब बसंत के फूल खिलेंगे।3। 

  •  खुशहाली का ये मौसम,
  • जीवन में अद्‌भुत रंग भरेगा।
  • दुःख की तपिश से मुरझाये,
  • चेहरों को ये हरा करेगा।
  • मंद पवन की छुअन से अपने,
  • अन्तस के सब घाव सिलेंगे।
  • समृद्धि का दीप जलेगा,
  • जब बसंत के फूल खिलेंगे।4। 


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