जब बसंत के फूल खिलेंगे
जब बसंत के फूल खिलेंगे
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- पीली चूनर ओढ़े सरसों,
- खेतों में खुशी बिखेरेगी।
- कोयल भी कू-कू-कू करके,
- सबकी ही सुध-बुध ले लेगी।
- फागुन की मस्ती में डूबे,
- रंगों से आँगन खूब सजेंगे।
- हर दिल में उल्लास बसेगा,
- जब बसंत के फूल खिलेंगे।1।
- आमों में होंगे बौर बहुत,
- महकेगी बागों की क्यारी।
- तितली के झुण्डों से शोभित,
- होगी फूलों की फुलवारी।
- हर मन में छायेगी आशा,
- कुछ कर जाने के भाव जगेंगे।
- अंग-अंग ऊर्जस्वित होगा,
- जब बसंत के फूल खिलेंगे।2।
- ढोलक की थापों थिरकन से,
- हर गली चौबारे झूमेंगे।
- जोड़ हाथ जयकार लगा,
- मंदिर की चौखट चूमेंगे।
- घर-घर माता की चौकी में,
- कन्या पूजन कर पुण्य मिलेंगे।
- होगा स्वागत नव संवत्सर का,
- जब बसंत के फूल खिलेंगे।3।
- खुशहाली का ये मौसम,
- जीवन में अद्भुत रंग भरेगा।
- दुःख की तपिश से मुरझाये,
- चेहरों को ये हरा करेगा।
- मंद पवन की छुअन से अपने,
- अन्तस के सब घाव सिलेंगे।
- समृद्धि का दीप जलेगा,
- जब बसंत के फूल खिलेंगे।4।
