इबादत
इबादत
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हम सब हैं ईश्वर की संतान
करते हैं उसका सम्मान
अलग अलग विधियां सब की
कोई सादे फूल चढ़ाये कोई महंगी बर्फी
सबकी अपनी श्रद्धा है सबका है विश्वास
पर तुम ही जानो हे प्रभु सबके मन के भाव
बस हम यही करते हैं अर्जी हमारी अरदास को
ठुकरा दो या प्यार करो ये आप की मर्जी।
