STORYMIRROR

Alok Singh

Others

4  

Alok Singh

Others

गुमशुदा की तलाश

गुमशुदा की तलाश

1 min
441


मैं हँसा तो लगा मैं फंस गया हूँ

ज़िन्दगी के घेरे में खो गया हूँ

पर कुछ बेचैनियां

अन्दर के जज़्बातों को

इधर से उधर रख रहीं थीं,

कुछ बेचैनियां

अन्दर ही अन्दर कह रहीं थीं

कहां फंस रहे हो?

ज़नाब अब भी संभल जाओ।

जो हसीन सा ख्वाब पाला है

अच्छा होगा,

जो बाहर निकल आओ।

ये डगर बहुत कठिन है

संभल न पाओगे

गिर गये जो कभी ,

उठ न पाओगे

यह सुन कब से परेशां सा हूँ

यह कौन था आज तक हैरान सा हूँ

ढूँढ़ रहा हूँ कभी बाहर तो कभी भीतर

उसी गुमशुदा की तलाश में हूँ।



Rate this content
Log in