Alok MS
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हमने ग़म को शब्दों में सजाया था बस,
लोगों ने 'न-जाने' इसे शायरी बना दिया।
शून्य के मधुर...
ऐ दिल तू यूँ ...
बातें हैं यह ...
तुझे कैसे न म...
सत्य और आभास
वक़्त और मसरूफ...
विरक्ति और शू...
यज्ञ और आहुति...
धर्म और सत्य
यह पल जो साथ ...