STORYMIRROR

Kajal Nayak

Others

4  

Kajal Nayak

Others

गजल

गजल

1 min
415

जो आबाद है अपने घरों में उनकी सब नुमाइश करते है

पर जिनके लूट गए आशियाने उन्हें कौन याद करते है


बिखर जाती है जिंदगीयाँ एक छोटा आशियाना बनाने में

मुफलिसी के झोंपड़ों की दुआही को कौन याद करते है


बड़े ही सूकूँ से सो रहे है अब वो अपने महलों में

जिसने बनाने में काट दी कई रातें उन्हें कौन याद करते है


ये वो रंगमंच है साहब जिसमें नुमाइश करने की रवायत है

बड़े मुंह से छोटों की वाह - वाही कौन याद करते है


जाने क्यूँ इतराते है कुछ लोग आज भी अपनी अना पर

जेब खाली हो उस शख्स की तौहीन कौन याद करते है


चाँद, सूरज, अम्बर, धरा पर ग़ज़ल लिखना शौक है सबका ,

मुफलिसी पर लिखी गई ग़ज़ल 'काजल' कौन याद करते है



विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन