गजल - आप यूँ ही
गजल - आप यूँ ही
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आप यूँ ही नहीं आजमाया करो,
गैर हम भी नहीं दिल लगाया करोI
ज़िंदगी का सफर हो अकेला कभी,
साथ हमदम हमें भी बुलाया करो।
ये चमन हो हमेशा बहारों भरा,
प्यार का गीत हमको सुनाया करोI
यार देना नहीं दोस्ती का सिला,
आग दिल में नहीं फिर जलाया करो।
इश्क मीठा ज़हर है इसे चाव से,
घूँट ही घूँट 'बोधन' पिलाया करो।
