STORYMIRROR

AKIB JAVED

Others

3  

AKIB JAVED

Others

ग़ज़ल

ग़ज़ल

1 min
245

हम किसी को अब क्यूँ लुभाते नहीं

बात ये है कि कुछ छिपाते नहीं


हम बसा कर दिल में भुलाते नहीं

देख कर चुपके से यूँ जाते नहीं


दीन  को  है बचाया  सजदे  से

वो  हुसैनी नज़र क्यूँ आते नहीं


सब लूटा डाले जो कर्बोबला में

दीन के ख़ातिर सर झुकाते नहीं


ख़ैर कब  तक  उठा  रहे नखरे

चाँद को पास क्यूँ  बुलाते नहीं


बिन  बुलाए  कभी  नही  आते

पहले जैसे क्यूँ रिश्ते नाते नहीं


साथ  देंगे  सदा  ये  वादा रहा

हाथ  को थाम  के छुड़ाते नहीं



Rate this content
Log in