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Kanchan Prabha

Others

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Kanchan Prabha

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एकता का पर्व

एकता का पर्व

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एकता का पर्व है होली

आओ खेले अबीर गुलाल

आज के दिन दुश्मन भी मिल कर

चेहरे पर रंग मले पीले लाल

मजनूँ भी तो कम ना होते

फैलाते रंगो की जाल

हँसते हँसते हुए लोट पोट

भंग पी जब सब पीटे झाल

किसी को भी पहचान सके ना

इतने रंगीन दिखते गाल

बिन सुर के ही गीत सुनाते

बहकी बहकी लगती ताल

नशे मे रामू काका चलते

आज बदल गई उनकी चाल

कोई भी आज के दिन बच ना पाये

आज किसी की ना गलती दाल



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