एकता का पर्व
एकता का पर्व
1 min
262
एकता का पर्व है होली
आओ खेले अबीर गुलाल
आज के दिन दुश्मन भी मिल कर
चेहरे पर रंग मले पीले लाल
मजनूँ भी तो कम ना होते
फैलाते रंगो की जाल
हँसते हँसते हुए लोट पोट
भंग पी जब सब पीटे झाल
किसी को भी पहचान सके ना
इतने रंगीन दिखते गाल
बिन सुर के ही गीत सुनाते
बहकी बहकी लगती ताल
नशे मे रामू काका चलते
आज बदल गई उनकी चाल
कोई भी आज के दिन बच ना पाये
आज किसी की ना गलती दाल
