एक सा लगता है
एक सा लगता है
ना तुम मुसकुराते हो, ना हम कभी हँसते है
दोनों पर हुआ सितम एक सा ही लगता है
दो टुकड़े मिले थे दिल के पड़े किसी कोने में
दोनों पर लगा जख्म एक सा ही लगता है
रंग एक सा ही था मगर फर्क सिर्फ बनावट में थी
एक थोड़ी नर्म थी दूसरे में थोडी गर्माहट थी
लगाकर धागा, सुई जो उठाया सिने के लिए
एक आशिक का लगा और दुसरा दिलरुबा का लगता है
थे दोनों ही अलग मगर थे यहा वो संग पड़े
दूर तन से रहे भला पर मन से थे साथ खड़े
पहले किसे उठाया जाय ये फैसला था हाकिम का
दोनों मे मगर पीछे होने जुनून एक सा लगता है
देखकर ये हाल दिल का फिर ये कहा हाकिम ने
चलो जोड़ देता हूँ मैं दिल दोनों का आधा बँटा
तू रख लेना हिस्सा अपना मन का पास खुद के मगर
उसका भी रखने का तुझमे एक लालच सा लगता है
थे जो दूर तो रोते थे वो संग रहने के लिए
जो अब संग है तो बात बिछड़ने की करते है
क्या जुस्तजू है बता दो बदनसीब मोहब्बत वालों
क्यूँ तुम्हारा मांगना कुछ बचपना सा लगता है।
