STORYMIRROR

Kamal Purohit

Others

2  

Kamal Purohit

Others

एक रिश्ता

एक रिश्ता

1 min
401

ख्वाब को हमने सजाया

आँखों को कितना रुलाया


दिल मेरा नादान मुझको

जाग कर रातों सताया


जिंदगी की ठोकरों से

जब गिरा तो उठ न पाया


ठोकरें जब जब लगी तो

हौसलों ने दम लगाया


कुछ तो कर के है दिखाना

सोच कर मैं मुस्कुराया


वो समझता क्या मुझे अब

मैं उसे समझूँ पराया


एक रिश्ता ज़िंदगी का

दिल ने दिल से भी बनाया


आज के आभासी जग में

गैर अपने घर पराया



Rate this content
Log in