एक मतला दो शेर
एक मतला दो शेर
1 min
117
बात सबके दिल की समझूँ और कुछ बोलूं नहीं
एक दिल मेरा भी है ये कैसे मैं भूलूं नहीं
अश्क करते हैं ग़िला तो रूठ जाता इश्क है
मैं दबा के सिसकियां फिर मुस्कुरा पाऊं नहीं
बेमुरव्वत दिल बेचारा है धड़कता आज भी
टूट के भी जी रहे हैं दर्द बतलाऊँ नहीं
