STORYMIRROR

Abhisekh Prasanta Nayak

Others

4  

Abhisekh Prasanta Nayak

Others

एक चिट्ठी की दास्तान

एक चिट्ठी की दास्तान

1 min
366

मैं हूँ एक चिट्ठी यारा सुन ले तू मेरी कहानी

किसी की मैं याद तो किसी की हूँ निशानी

थी मैं कोरा कागज़ भर दिया मुझ को स्याही से

चाहे किसी की ख़बर चाहे हो बरक़त ईलाही से

पढ़ते जब मुझ को आँखों में आ जाता है पानी

मैं हूँ एक चिट्ठी यारा सुन ले तू मेरी कहानी


कोई मुझ में हर अपना ख़्वाब सजाए रखता है

कोई मुझ में अपनी दिल की बात बताए रखता है

कभी यादों का गुलदस्ता तो कभी गीत के बोल

कोई मुझसे यूँ हर एक बात सुनाए रखता है

यादों की अल्फ़ाजों की मैं हूँ इकलौती जुबानी

मैं हूँ एक चिट्ठी यारा सुन ले तू मेरी कहानी


रहती थी मैं पहले हर मन के बसेरों में

मिलने लगी हूँ मैं अब दफ़्तर के ढेरों में

डूबा है अब हर इंसान आज के मझधार में

खो गयी हूँ मैं वक़्त के इन पहरों में

मुझ पे कोई क़िताब तो कभी लिखते है कहानी

मैं हूँ एक चिट्ठी यारा सुन ले तू मेरी कहानी...


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन