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Abhimanyu Lohani

Others

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Abhimanyu Lohani

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दोस्त

दोस्त

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हुई है शाम, तो चिंगारी हम भी जलाएंगे,

तुम दूर हुए तो क्या हुआ दोस्त, तुमसे मिलने तो जरूर आयेंगे,

माना की मुक्कदर में लिखा था, दूर दूर ही रहना,

जब आयेंगे सब अपने हमवतन,

तो मिल के वहीं सब अपनी यादों के जाम छलकायेंगे।

हुई है शाम तो, चिंगारी........


चलो उन गलियों में थोड़ा, फिर से घूम कर आते है,

अपनी यादें जो वहां बिखरी है, समेट कर आते है !

जहां एक दूसरे के कंधे, थामा करते थे हमें,

आओ चलो थोड़ा मिल के, एक दूसरे का सिर एक दूसरे के कंधे पर रख के आते है।


फिर से एक बार उस गली के नुक्कड़ पर कड़क चाय पीकर आयेंगे,

ठंडी के मौसम में तुम्हारे पैकेट में, थोड़ा हाथ रख के आयेंगे !

तुम रूठो तो, तुम्हे और गुस्सा करके आयेंगे,

घर आने पर तुम्हे, थोड़ा प्यार से मना के आयेंगे,

हुई है शाम, तो चिंगारी जला के आयेंगे।


थोड़ा लड़कपन, बचपन की यादें दोहरा के आयेंगे,

शाम में मिलने की वो मोड़ की, हवाएं महसूस करके आयेंगे,

वो कॉलोनी में उड़ने वाली, तितलियों का हाल जान के आयेंगे

चलो मिल के एक बार फिर, अपनी यादों को जी के आयेंगे।

हुई है शाम तो चिंगारी जला के आयेंगे.....


तू दूर है इसका गम है मुझे,

लेकिन तू अपनी चाहत की आसमां पर है इसका फक्र है मुझे,

सुना है अब तुम किसी से रूठते कम हो....

अपनी कामों में फिक्रमंद, लोगो से मिलते कम हो...

चलो मिल के एक दूसरे का फिक्र करके आयेंगे,

हुई है शाम तो दोस्त, चिंगारी जला के आयेंगे ।



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