धर अपनी मंजिल
धर अपनी मंजिल
1 min
138
धर मंजिल अपनी
कर साबित खुद को,
क्यों आस लगाये बेठे हो
आती हैं कई काँटों की राहें
पर बना उत्साह की तीखी एक धार
और काट दे उन काँटों की राहों को
फिर चल ,वापस चल
कर दिखा , और
धर मंजिल अपनी।
