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Phool Singh

Children Stories Inspirational Children

4  

Phool Singh

Children Stories Inspirational Children

देख मुझे माँ

देख मुझे माँ

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शांतचित्त, गंभीर हूँ कितनी, न शरारत करती कभी 

लड़ती-झगड़ती जो तुमसे रहती, देख माँ, आज मैं कितनी बदल गई।


सारी शिकायतें धूमिल होती, नकचढ़ी भी तो मैं न रही 

जो मिल जाता खुश हो जाती, परिधान, पहनती तेरे भेजे सभी।


तरस गई माँ तेरी गोद को, भाव शून्य सी हो मैं गई 

जग जाहीर न करती दु:ख-दर्द को, कर्तव्य भी करती पूर्ण सभी।


न थकती, न कभी रुकती, आराम भी न करती माँ मैं कभी  

याद आते क्षण वो सारे, बिताएँ तेरे संग जो थे कभी।


ख्वाहिशें सबकी पूरी करती, दूर, न होते गीले-शिकवे कभी  

स्त्री जीवन कभी अपना न होता, एहसास ये होता मुझको अभी।


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