ढलता सूरज
ढलता सूरज
1 min
235
ढलता सूरज
गहराती लालिमा
अंधेरे में भी आस
दूर आसमान में
आधा चंद्रमा देता है साथ
जब सूरज डूब जायेगा
मैं दूँगा साथ
अद्भुत प्रकृति के अद्भुत रंग
मानव के साथ चलती संग संग
ग़लती हमारी जो पर्यावरण
बिगाड़ते
मुसीबत आने पर दोष प्रकृति
पर डालते
हर रोज़ सुबह
सूरज का उगना
हर शाम सूरज का ढलना
क्या कोई रोक पाया ?
फिर क्यों मानव स्वयं पर
इतराया ?
सब खेल कर्मों का है
सतकर्म कर विजयी भव
सूरज बन
उगता भी लाल
डूबता भी लाल
पर..
दोनों का हर कोई करता
इंतज़ार ..
