दादा की यादें
दादा की यादें
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नज़्मों की मिठास
रूठ गयी है
तुम्हारे लौट जाने के बाद
अब दिन भर
उदासियाँ रहती हैं
लम्हों में,
उदासियाँ रहती हैं
पलकों पर आ बैठे हैं आंसू
लबों पे खामोशियाँ रहती हैं
मैं वक़्त से
लड़ती रहती हूँ
खुद से खुद
झगड़ती रहती हूँ
नए सपनों में
नए किस्सों में
नए रँग खरीद
नए उमंग तलाश
मैं बिखरती हूँ
मैं संवरती रहती हूँ
सुनो, सब ठीक है
फिर भी भीतर,
सिसकियां रहती हैं
हंसकर मुसकुराने के बाद
सब ठीक है पर
कुछ ठीक नहीं है
तुम्हारे लौट जाने के बाद।
