STORYMIRROR

Shivangi Pandey

Others

4  

Shivangi Pandey

Others

दादा की यादें

दादा की यादें

1 min
301

नज़्मों की मिठास 

रूठ गयी है

तुम्हारे लौट जाने के बाद

अब दिन भर 

उदासियाँ रहती हैं

लम्हों में,

उदासियाँ रहती हैं

पलकों पर आ बैठे हैं आंसू 

लबों पे खामोशियाँ रहती हैं

मैं वक़्त से 

लड़ती रहती हूँ

खुद से खुद

झगड़ती रहती हूँ

नए सपनों में

नए किस्सों में

नए रँग खरीद 

नए उमंग तलाश

मैं बिखरती हूँ

मैं संवरती रहती हूँ

सुनो, सब ठीक है

फिर भी भीतर,

सिसकियां रहती हैं

हंसकर मुसकुराने के बाद

सब ठीक है पर

कुछ ठीक नहीं है

तुम्हारे लौट जाने के बाद।


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन