STORYMIRROR

sunil saxena

Children Stories

3  

sunil saxena

Children Stories

चला कौआ चाटने राख

चला कौआ चाटने राख

1 min
22



चला कौआ चाटने राख

मिला उसे भुट्टे का एक दाना

ले चला उड़ कर अपनी चोंच में उस भुट्टे के एक दाने को पत्थर समझ के

डाला उस भुट्टे के एक दाने को उसने पानी के बर्तन में पत्थर समझ के


तैरने लगा वो भुट्टे का दाना पानी के बर्तन में

ना तो मिला पानी और ना ही मिला वो भुट्टे का एक दाना कौए को

गुस्से में आकर मारी एक ठोंग पानी के उस बर्तन को

टूट गया पानी का बर्तन , बह गया पानी मिटटी में

कौआ भुट्टे के एक दाने को ले कर उड़ चाला आसमान की ओर

गिरा वो भुट्टे का एक दाना कौए की बीट में धरती पर बन कर एक बीज

बीट की नमी से धरती ने भी खोला अपना गर्भ 

बारिश की एक बूंद से फूटा अंकुर , भुट्टे के उस बीज से

बंजर धरती पर भी बना भुट्टे का बगीचा उस भुट्टे के एक दाने से

सूरजमुखी ने भी अपनी जगह बनाई उस भुट्टे के बगीचा में

आ गई फूलों की बहार उस बंजर ज़मीन पे

फूलों की वादियां बन गई वो बंजर धरती

केवल कौए की चोंच में एक भुट्टे के एक दाने से!

 



विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन