STORYMIRROR

manisha sinha

Others

2  

manisha sinha

Others

चाँदनी

चाँदनी

1 min
502

गर्मी की वो रातें जब,

ठंडी झोंकों से बातें होती थी।

चाँदनी में लेटे लेटे, आसमान में

छुपे चेहरों की बातें होती थी।

टिमटिमाते तारें जो,

सुख दुख के गवाह थे।

आज उनके झलक को भी ,

हमारी आँखें तरसती हैं।


चाँद की चाँदनी जो,

पूरे छत को चमकाती थी।

पूर्णिमा में जो शहद बरसाती थी।

माँ की खीर में भी,

फिर मिठास सी भर जाती थी।


वह चाँदनी मिट गई,

इमारतों के चकाचौंध में

वो चाँदनी गई, मिठास ले गई।

चौंधियाती आँखों में, अँधकार छोड़ गई।



Rate this content
Log in